गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

"जीवन" में "तकलीफ़"

"जीवन" में "तकलीफ़" उसी को आती है, जो हमेशा "जवाबदारी" उठाने को तैयार रहते है,
और ...
जवाबदारी लेने वाले कभी हारते नही,
या तो "जीतते" है, या फिर "सिखते" है...!!
जय श्री कृष्णा

AFFIRMATION FOR TODAY

If you really want to do something, you'll find a way; if you don't, you'll find an excuse.

Your action for today is to take something you have been making excuses for not doing, and either do it or stop saying you want to do
it!

✫*¨`*✶♪.¸¸.✻✿
AFFIRMATION FOR TODAY
" Everything that I start is a huge success. I excel in everything that I do."
Good Morning! Have an Extraordinary day!

मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

शब्द मुफ्त में मिलते है....

शब्द मुफ्त में मिलते है....
                   लेकिन
उनके चयन पर निर्भर करता है...  कि
उसकी कीमत मिलेगी
                       या
चुकानी पड़ेगी....

जन्म से

जन्म से ना तो कोई "दोस्त"
पैदा होता है और ना ही "दुश्मन"
वह तो हमारे घमंड,ताकत या व्यवहार से
कोई एक बन जाता है.
 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

"बुराई " करना रोमिंग की तराह है.

* "बुराई " करना रोमिंग की तराह है.
-
* करो तो भी चार्ज लगता है और सुनो तो भी चार्ज लगता है.
-
* और...
- * "नेकी" करना LIC की तराह है.
-
* जिंदगी के साथ भी.
* जिंदगी के बाद भी.

गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

शांति

दिन की शुरूआत में हमें लगता है जिंदगी में पैसा बहुत ज़रूरी है,
पर दिन ढलने पर समझ आता है, जिंदगी में शांति अधिक ज़रूरी है।

वक्त

हमेशा..
बदलते तो इंसान है ,

"वक्त" का नाम तो बस ..
एक बहाना है...!!

मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

लोहा नरम होकर

 
लोहा नरम होकर औजार बन जाता है,
सोना नरम होकर जेवर बन जाता है ! 
मिट्टी नरम होकर खेत बन जाती है, 
आटा नरम होता है तो रोटी बन जाती है !
ठीक इसी तरह अगर इंसान भी नरम हो जाये तो लोगो की दिलों मे अपनी जगह बना लेता है !

सदैव बेहतर की उम्मीद करे ।
         

रविवार, 17 अप्रैल 2016

नींबू के रस

अच्छी बात सच्ची बात

"जिस प्रकार नींबू के रस की एक बूँद हज़ारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती है,
उसी प्रकार मनुष्य का अहंकार भी अच्छे से अच्छे संबंधों को बर्बाद कर देता है।"

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

रिश्ते में.. खटास

पानी ने दूध से मित्रता की और उसमे समा गया..

जब दूध ने पानी का समर्पण देखा तो उसने कहा-
मित्र तुमने अपने स्वरुप का त्याग कर मेरे  स्वरुप को धारण किया है....

अब मैं भी मित्रता निभाऊंगा और तुम्हे अपने मोल बिकवाऊंगा।

दूध बिकने के बाद
जब उसे उबाला जाता है तब पानी कहता है..

अब मेरी बारी है मै मित्रता निभाऊंगा
और तुमसे पहले मै चला जाऊँगा..
दूध से पहले पानी उड़ता जाता है

जब दूध मित्र को अलग होते देखता है
तो उफन कर गिरता है और आग को बुझाने लगता है,

जब पानी की बूंदे उस पर छींट कर उसे अपने मित्र से मिलाया जाता है तब वह फिर शांत हो जाता है।

पर
इस अगाध प्रेम में..
थोड़ी सी खटास-
(निम्बू की दो चार बूँद)
डाल दी जाए तो
दूध और पानी अलग हो जाते हैं..

थोड़ी सी मन की खटास अटूट प्रेम को भी मिटा सकती है।

रिश्ते में..
खटास मत आने दो॥
"क्या फर्क पड़ता है,
हमारे पास कितने लाख,
कितने करोड़,
कितने घर,
कितनी गाड़ियां हैं,

खाना तो बस दो ही रोटी है।
जीना तो बस एक ही ज़िन्दगी है।
I
फर्क इस बात से पड़ता है,
कितने पल हमने ख़ुशी से बिताये,
कितने लोग हमारी वजह से खुशी से जीए।